Justice and politics in energy access for education, livelihoods and health: How socio-cultural processes mediate the winners and losers

Justice and politics in energy access for education, livelihoods and health: How socio-cultural processes mediate the winners and losers

Energy Research and Social Science, Volume 40, June 2018, Pages 3–13

Justice and Politics: With access to modern lighting the boy of the household gets to study while the girl has to cook on a hazardous and polluting wood fired earthen hearth

Abstract

The rhetoric on development benefits of energy access often focuses on education, livelihoods and health. Using case studies of two energy access projects in India, this paper demonstrates that these claims, while true in part, are neither simple nor straightforward. It argues that pre-existing socio-cultural processes mediate the development outcomes of energy access projects. In particular, the roles of gender, socio-economic positions and the local economy are vital in understanding the links between education, livelihoods, health and energy.
This paper is important for two reasons. First, working with culture as a mediator, it provides nuanced insights into relationships between energy access and three key development goals. Second, by presenting this analysis, the paper identifies a need for further research on the relationships between socio-cultural processes, development and energy access and, how by keeping these processes in mind, the benefits of energy access could be extended to less privileged social groups. This paper is based on a nine-month long ethnographic research in five villages in India’s Bihar state. Home tours, interviews, participant observations and group discussions were used to collect the data.

Please read this in conjunction with my previous article on Cultures of Lights.

Link to open access article:
https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2214629617304449


शिक्षा, आजीविका और स्वास्थ्य के लिए ऊर्जा की पहुंच में न्याय और नीति: कैसे सामाजिक-सांस्कृतिक परिक्रिआएं जीतने और हारने वालों की मध्यस्थता करती हैं 

खंड 40, जून 2018, पृष्ठ 3-13

सार
ऊर्जा और विकास के संबंध पर संवाद अक्सर शिक्षा, आजीविका और स्वास्थ्य पर केंद्रित होते हैं। भारत में दो ऊर्जा परियोजनाओं का अध्ययन करते हुए, यह पत्र दर्शाता है कि ये दावे, जबकि भाग में सत्य, न तो सरल और न ही सीधे हैं। इस पत्र का तर्क है कि पहले से मौजूद सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रियाएं ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के संबंधों की मध्यस्थता करती हैं। विशेष रूप से, शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य और ऊर्जा के बीच संबंधों को समझने में लैंगिक भेदभाव, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और स्थानीय अर्थव्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण है।
यह पत्र दो कारणों के लिए महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, संस्कृति की मध्यस्थता को दिमाग में रखते हुए, यह ऊर्जा की पहुंच और तीन प्रमुख विकास लक्ष्यों के बीच के संबंधों में सूक्ष्म अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। दूसरा, इस विश्लेषण को प्रस्तुत करते हुए, ये पत्र सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रियाओं, विकास और ऊर्जा की पहुंच के बीच के संबंधों, और इन प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए, ऊर्जा की पहुंच के लाभों को कमज़ोर सामाजिक समूहों तक पहुंचने के तरीकों पर और शोध की ज़रूरत को दर्शाता है।
यह पत्र भारत के बिहार राज्य के पांच गांवों में नौ महीने के नृवंशविज्ञान अनुसंधान पर आधारित है। आंकड़े इकट्ठा करने के लिए होम टूर, साक्षात्कार, प्रतिभागी अवलोकन और समूह चर्चाओं का इस्तेमाल किया गया था।

यह कृपया संस्कृति पर मेरे पिछले लेख के साथ पढ़ें.

ओपन एक्सेस लेख के लिए लिंक:
https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2214629617304449 

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