Solar energy for all? Understanding the successes and shortfalls through a critical comparative assessment of Bangladesh, Brazil, India, Mozambique, Sri Lanka and South Africa

Solar energy for all? Understanding the successes and shortfalls through a critical comparative assessment of Bangladesh, Brazil, India, Mozambique, Sri Lanka and South Africa

Energy Research & Social Science, Volume 48, February 2019, Pages 166-176



Abstract

Lanterns, homes systems, hot water systems and micro-grids based on small-scale solar have become prominent ways to address the energy access challenge. As momentum grows for this form of energy transition this paper draws together research on small-scale solar in six different countries – Bangladesh, Brazil, India, Mozambique, Sri Lanka and South Africa – to argue for a need to understand how, when, and for whom solar provides energy access. It argues that an assemblage perspective can provide vital insights into the diversity and dynamism of energy access. The paper demonstrates that the diverse ways in which solar provides energy access is a function of the flexibility/fixity of the socio-technical assemblage and the de/centralisation of agency. The central thesis of this paper is that energy access is fluid and ever changing and we need fluid, easily maintainable, locally modifiable ‘assemblages’ for providing such access. Using this perspective, we find three common features of solar energy access across our case studies. First, there are significant gaps between what solar projects are designed to achieve and what they deliver, which are highly contingent on the flexibility of their structure and the decentralisation of agency within them. Second, access needs to endure continuously. Third, to foster enduring access, projects should embed logics of improvisation. This paper is based on six separate qualitative research projects conducted during 2010–2016. It draws data from 482 interviews, 91 home tours and 12 group discussions.

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सभी के लिए सौर ऊर्जा? बांग्लादेश, ब्राजील, भारत, मोजाम्बिक, श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका के महत्वपूर्ण तुलनात्मक मूल्यांकन के माध्यम से सफलताओं और बाधाओं को समझना

खंड 48, फरवरी 2019, पृष्ठ 166-176

सार
लालटेन, होम सिस्टम, गर्म पानी की व्यवस्था और छोटे पैमाने पर सौर-आधारित माइक्रो-ग्रिड ऊर्जा पहुंच की चुनौती को संबोधित करने के प्रमुख तरीके बन गए हैं। यह पत्र छह अलग-अलग देशों - बांग्लादेश, ब्राजील, भारत, मोजाम्बिक, श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका - में छोटे स्तर के सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर एक साथ शोध करता है और यह समझने की कोशिश करता है कि कैसे, कब, और किसके लिए ये परियोजनाएं ऊर्जा  प्रदान करती हैं। यह तर्क देता है कि असेम्ब्लेज थ्योरी ऊर्जा पहुंच की विविधता और गतिशीलता को समझने में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है। यह पत्र दर्शाता है कि सौर ऊर्जा प्रदान करने के विविध तरीकों की सफ़लता उनके सामाजिक-तकनीकी संयोजन के लचीलेपन/दृढ़ता और एजेंसी के केंद्रीकरण/विकेंद्रीकरण पर निर्भर है। इस पत्र की केंद्रीय वाद है कि ऊर्जा पहुंच अस्थिर है और बदलती रहती है और ऊर्जा लोगों तक पहुंचने के लिए के लिए परिवर्तनीय, आसानी से मरम्मत होने योग्य, स्थानीय रूप से परिवर्तनीय परियोजनाओं की आवश्यकता है। इस दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए, हम अपने केस स्टडीज में सौर ऊर्जा के उपयोग की तीन सामान्य विशेषताएँ बताते हैं। सबसे पहले, सौर परियोजनाएँ जो काम करने के लिए बनाई जाती हैं और जो काम असल में कर पाती हैं, वो उनकी संरचना के लचीलेपन और एजेंसी के विकेंद्रीकरण पर निर्भर है। दूसरा, ऊर्जा की पहुंच को लगातार बनाये रहना आवश्यक है। तीसरा, स्थायी पहुंच को बढ़ावा देने के लिए, परियोजनाओं को इम्प्रोवाइसेशन पर ध्यान देना चाहिए। यह पत्र 2010-2016 के दौरान आयोजित छह अलग-अलग अनुसंधान परियोजनाओं पर आधारित है। यह 482 इंटरव्यू, 91 होम टूर और 12 ग्रुप डिस्कशन से आंकड़े खींचता है।

ओपन एक्सेस लेख के लिए लिंक:
https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2214629618302603?via%3Dihub

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